Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 102, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
क्रियाफलानि चिद्व्योमगमनादीनि राघव ।
अज्ञानामपि सिध्यन्ति मन्त्रौषधिवशादिह ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, इस संसार में आकाशगमन आदि जो क्रियाफल हैं, वे सब मंत्र, औषधि के
वश से अज्ञानियों को भी अक्सर प्राप्त हो जाते हैं