Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 102, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
गुणं ममेमं जानातु जनः पूजां करोतु मे ।
इत्यहंकारिणामीहा न तु तन्मुक्तचेतसाम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरे इस गुण को संसार जाने
और मेरी पूजा करे, यह अभिलाषा अहंकारियों को होती है, जीवन्मुक्त विवेकियों को नहीं
होती