Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 102, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
न तदस्ति पृथिव्यां वा दिवि देवेषु वा क्वचित् ।
यदुदारमनोवृत्तेर्लोभाय विदितात्मनः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
पृथिवी पर, स्वर्ग में देवताओं में, अन्तरिक्ष या कहीं पर भी ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो उदारचेता
तत्त्वज्ञानी को लुभा सके