Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 102, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
कश्चिद्विपश्चिद्विख्यातः कश्चिच्छ्रोता श्रुतेः स्मृतेः ।
कश्चिद्राजा द्विजः कश्चित्कश्चिदज्ञ इव स्थितः ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई विख्यात पण्डित होता है, तो
कोई श्रुति-स्मृति का श्रोता भी दीखता है । कोई राजा, तो कोई ब्राह्मण तथा कोई अज्ञानी के
समान स्थित रहता है