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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 102, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

सर्वाभिनन्दिताचारः सर्वाचारबहिष्कृतः । वीतशोकभयायासः सशोक इव लक्ष्यते ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

†किमाचारोऽवतिष्ठते“ इससे पूछे यये बाह्य लक्षणों का वर्णन करते है / सर्वाभिनन्दित आचारों से युक्त होने पर भी वह समस्त आचारों से बहिष्कृत है शोक, भय तथा आयास से रहित होने पर भी वह अज्ञ जनों का दुःख देखकर उनके लिए शोक करता है, अतः शोकयुक्त-सा दीखता है