Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 103, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 103, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 103 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
न चान्यदन्यच्चिन्मात्रं क्वचित्किंचन कस्यचित् ।
सर्वानुभवसादृश्ये कीदृशी नाम सान्यता ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
सादृश्य है । उसकी भला कैसी भिन्नता होगी ? अर्थात् वह अन्यता मिथ्या ही है (७)