Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 103, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 103, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 103 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तावन्मात्रं च पुरुषः कदाचित्स न नश्यति ।
यदि नश्यति चिन्मात्रं भूयो जायेत किं कथम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
अविनाशी पुरुष विन्मात्रस्वरूय रहे, इससे प्रक्रत मे क्या आया 2 इस पर कहते हैं /
चूँकि पुरुष चिन्मात्रस्वरूप है, इसलिए कदापि वह नष्ट नहीं हो सकता । यदि चिन्मात्र नष्ट हो
जाय, तो फिर क्या उत्पन्न होगा और कैसे उत्पन्न होगा ?