Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 19
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हिन्दी अर्थ
यदि कड शक्रा करे कि नित्य अपरोक्ष वस्तु के विषय में प्रवृत्त उपदेश-क्चन एक बार की
अवृत्ति से ही अज्ञान का विनाश कर कस्तु को प्रकट कर ही देगा. फिर अभ्यास की क्या आवश्यकता
है ? तो इस पर कहते हैं ।
हे सज्जन, यद्यपि आप लोगों का यहाँ पर यह अज्ञान विनष्ट हो चुका है फिर भी अभ्यास के
बिना वह जीवन्मुक्ति प्रतिष्ठा को नहीं प्राप्त हो सकता है