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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 23

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अनात्मथासपरो' के अभ्यास से विमुख हुए पुरुषों को इस शास्त्र का अभ्यास करना चाहिये, यह कहते हैं । इसलिए असत्‌ शास्त्रों की विचारणा से आप लोग निवृत्त हो जाइये । जैसे युद्ध से विजयलक्ष्मी प्राप्त होती है वैसे ही इस सत्शास्त्र के अभ्यास से आप लोगों को अवश्य शांति प्राप्त होगी