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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 24

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

यह मनरूपी नदी विवेक और अविवेक दोनों ओर बहती है जिस ओर प्रयत्न से (विरोधी दूसरे स्रोत को रोकने के यत्न से) बहाई जाय, वहींपर स्थिर हो जाती है