Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 25
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हिन्दी अर्थ
इस शास्त्र के सिवा विवेक का
सर्वश्रेष्ठसाधन आज तक न तो कोई हुआ और न आगे होगा, इसलिए परम बोध की प्राप्ति के लिए
इसी का पुनः मनन करना चाहिए