Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 53
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हिन्दी अर्थ
वासना की ननिवृत्ति में आपका इतना बड़ा आग्रह क्यों है ? ऐसी आशंका होने पर कहते हैं ।
(ष) इस मोक्षशास्त्र की अवहेलना करने से आत्मज्ञान की अप्राप्ति ही आत्महत्या है ।
हे महामते, आत्मा का पूर्णरूप से उद्धार करने के लिए वासना की निवृत्ति को छोड़कर दूसरा
कोई भी उपाय न कभी था और न होगा