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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 52

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

यदि कड आशंका करे कि वैराग्य ही परम सार क्यों है 2 तो इस पर वैराग्य के बिना वासनाओं की तनुता (अल्पता) की सिद्धि नहीं हो सकती, ऐसा कहते हैं । जब तक सकल पदार्थो में वैराग्य नहीं प्राप्त होता तब तक पदार्थों की वासना कम (निवृत्त) नहीं होती