Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 51
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हिन्दी अर्थ
जो पुरुष
इसी लोक में नरकरूपी व्याधि के प्रतीकार का उपाय नहीं करता, वह औषधिरहित (जहाँ औषधि
दुर्लभ है) स्थान में जाकर नरकरूपी रोगों से छटपटाता हुआ क्या करेगा ?