Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 60
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हिन्दी अर्थ
वट
के बीज के समान साकार का साकार ही बीज हो सकता है। बीज वह वस्तु हो उससे साकार
विसदृश अन्य की उत्पत्ति कैसे हो सकती है ?