Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 71
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हिन्दी अर्थ
यदि कर्ता के अभाव से जगत् उत्पन्न ही नहीं हुआ तो हम लोगों का क्या स्वरुप है 2 केसे
जयत् में स्थित हैं 2 इस शंका पर कहते हैं /
ये हम लोग देह आदि मूर्तता से रहित चिदात्मरूप ही हैं एवं अन्य लोग भी हमारी नाईं ही
चिदात्मरूप ही है तथापि जैसे स्वप्न में आपके स्वप्नमानव होते हैं वैसे ही अपनी कल्पना से ही
स्थित हैं