Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 79
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 79 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 79
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, वही अशेष विशेषो से शून्य चिदाकाश
सब भूतो का स्वभाव है, उसी में ज्ञानी लोग समाधि द्वारा स्थित रहते हैं, चिदाकाशरूप उससे
ये पृथिवी आदि पदार्थ विचलित नहीं होते हैं