Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 78
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 78 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 78
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हिन्दी अर्थ
क्षणभर में एक देश से दूसरे
देश की प्राप्ति में मध्य में ज्ञान का सकल विशेषों से शून्य जो स्वरूप है वही अनुभव का मुख्य
दृष्टान्त है उससो अन्य नहीं