Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 96
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 104, verse 96 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 96
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हिन्दी अर्थ
इसलिए चिदाकाश
ही जगत् के आकार में दिखाई देता है यह सब चिद्रूपी सूर्य का निराधार प्रकाशन है