Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 106, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यस्मात्सर्वाः प्रसूयन्ते सर्गप्रलयविक्रियाः ।
यस्मिंश्चैव प्रलीयन्ते यन्मयास्तच्चिदम्बरम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रकाश ही अन्धकार बन जाता है क्योकि उल्लू आदि की नींद ऐसी देखी जाती
है कि उसमें दिन ही स्वप्नहेतु (रात्रि) बन जाते हैं