Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 106, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 106, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 106 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
यथा भावस्य भावत्वं यथा शून्यस्य शून्यता ।
आकारिणो यथाकारस्तथा चिन्नभसो जगत् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पत्थर का बना हुआ पात्र पत्थर-विहीन नहीं दीखता वैसे ही चिन्मय चेत्य
(जगत्) भी चित्भिन्न नहीं मालूम होता