Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अजातेनासतार्थेन खेन व्यवहरन्ति ये ।
मूढा मृतमजातं वा तनयं पालयन्ति ते ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जिससे सुषुप्ति के साक्षी, स्वप्न ओर जाग्रत के द्रष्टा, दर्शन ओर दृश्यरूप त्रिपुटी का
उदय होता है ओर जिसमें अस्त होता है, उसे आप निर्विकार चिदाकाश जानिये