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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

कुतः पृथ्व्यादयः केन के नाम कथमुत्थिताः । चिद्व्योमेत्थमिदं शान्तं प्रकचत्यात्मनात्मनि ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

विविध प्रकार के सभी पदार्थज्ञान जिससे ही उदित होते हैं और जिसमें ही आलोचन, विमर्श, अध्यवसाय, हेय ओर उपादेयरूप से उत्तरोतर परिणत होते हँ वह चिदाकाश कहा जाता है