Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
कार्यकारणकालादिकल्पनाकुलचेतसाम् ।
एवं पृथ्व्यादयः सन्ति तैर्बालैरलमस्तु नः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें सब
कुछ लीन होता है, जिससे सब उदित होता है, जो सर्वस्वरूप है, जिसने सबको सर्वतः व्याप्त कर
रक्खा है और जो सदा सर्वमय है, वह चिदाकाश कहा जाता है