Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 18
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हिन्दी अर्थ
जिसके उन्मेष ओर
निमेष से (पलक उठाने ओर गिराने से) जगत् सत्ता के प्रलय और उदय ({)) होते है, स्वानुभवरूप
जो अपने हृदय में स्थित है, उसे आप चिदाकाश जानिये