Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 17
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हिन्दी अर्थ
सुषुप्ति ओर प्रलयरूप निद्रा के निवृत्त होने पर जिस प्रत्यगात्मा से विक्षेपशक्तिवश
जाग्रत स्वप्नरूप ओर आकाशादिस्वरूप विश्व का आविर्भाव होता है ओर विक्षेपशक्ति के शान्त
होने पर पूर्वोक्त विश्व विलीन हो जाता है, वह चिदाकाश कहलाता है