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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 16

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जिससे सृष्टि ओर प्रलयरूप सब विकार उत्पन्न होते हैं, जिसमें लीन हो जाते हैं और जो सबका उपादान कारण है, वह चिदाकाश है । (इससे यतो वा इमानि श्रुतानि जायन्ते“ इस श्रुति मे उक्त तटस्थ लक्षण दिखलाया