Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 107, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 41
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हिन्दी अर्थ
माया का त्याग होने पर तो द्वैत का अभाव होने से न भासक है और न
भासन है, अनिवर्चनीयरूप यह सत् है या असत् है यह कौन जानता है, क्योकि बाधित का विचार
ही क्या हो सकता है ?