Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 108, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 108, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 108 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
मर्यादापालने युक्ता अकम्पनबलाधिकाः ।
मन्त्रिष्वप्यस्य चत्वारो दिक्षु सत्सागरा इव ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
तात्विक दृष्टि में प्रथिवी आदि की अत्यन्त असंभावना अपने अनुधव-बल से कहते हैं।
ये पृथिवी आदि कहाँ से हुए, किससे हुए और कैसे हुए ? इनका स्वरूप क्या है ? इस प्रकार
यह शान्त चिदाकाश ही अपने में अपने-आप स्फुरित होता है