Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 108, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 108, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 108 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
तैरशेषककुप्चक्रनाभिराभासितावनिः ।
आसीत्सुदुर्जयो जेता स सुदर्शनचक्रवत् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
मूढद्वाष्टि को तो हम प्रमाण नहीं मान सकते, ऐसा कहते हैं /
कार्य, कारण, काल आदि की कल्पनावश व्याकुल चित्तवाले जिन मूढ़ों की दृष्टि में इस तरह
पृथिवी आदि हैं, उन मूढो से हमें कोई मतलब नहीं है