Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 108, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 108, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 108 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
राजहंस इवाब्जिन्यामृक्षचक्र इवोडुराट् ।
सुमेरुरिव शैलौघे यः सभायामराजत ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
पृथिवी आदि प्रपंच चिद्रूपी बालक
की कल्पनाओं का राशिरूप है, शून्यरूप है, व्यर्थ है, अवस्तुरूप है, भ्रान्तिमात्र से आकाश में
उदित है, अतः इसमें भोगास्था कैसे संभव है ?