Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
नीतमायुरनायासविलासविभवश्रिया ।
प्रजाभ्यो दत्तमभयमासमुद्रसमुद्रितम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
उन मन्त्रियों के कारण वह
राजा सकल दिशारूप पहियों का नाभि की तरह आधारभूत बनकर सुदर्शन चक्र के समान शत्रुओं
द्वारा अतिरस्करणीय ओर स्वयं विजेता हो गया था