Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
आक्रान्तवसुधापीठाः पादपीठे कृता द्विषः ।
लताः फलभरेणेव नमिताः ककुभो दश ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
एक समय पूर्व दिशा से एक चतुर
गुप्तचर उसके पास आया । उसने एकान्त में राजा से कालगति के समान अनिवार्य होने के कारण
कर्णकट् वचन कहा