Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
प्रजाचित्तेन्दुबिम्बेषु लिखितं धवलं यशः ।
भूमावारोपिता कीर्तिलता त्रिपथगामिनी ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
"भगवन्, विशाल बाहुरूपी वृक्षोपर डाले हुए पृथ्वीरूपी गऊ के बन्धन
से आप कभी विमुख नहीं हुए यानी सदा पृथिवी को आपने अपनी बाहुओं पर बाँध रक्खा है । आप
कृपाकर मेरे मुँह से वृत्तान्त सुनिये ओर फिर जो समयोचित हो उसे करने की कृपा कीजिये