Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
कोशवद्भरिता रत्नैः सुहृन्मित्रार्यबन्धवः ।
निपीतोऽर्णवतीरेषु नालिकेररसासवः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, पूर्व दिशा के सामन्त की ज्वर से मृत्यु हो गई है । मानों शत्रुओं को परास्त कर चुके
आपसे आज्ञा पाकर वे यमराज को जीतने के लिए यमलोक चले गये हैं