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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

द्विषामाकम्पिता भेकगलाङ्गत्वगिवासवः । मच्छासनाङ्किता जाता द्वीपान्तरकुलाचलाः ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

उनके मरने के उपरान्त दक्षिण दिशा के अधिपति (आपके सामन्त) चारों ओर से पूर्वं ओर दक्षिण दिशा को स्वायत्त करने के लिए उद्यत हुए, किन्तु उन्हें भी शत्रु ने पूर्वं ओर पश्चिम की सेनाओं द्वारा आक्रमणकर मार डाला