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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verses 18–19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verses 18–19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 18,19

संस्कृत श्लोक

विहृतं सिद्धसेनासु दिगन्तनवभूमिषु । भूम्यन्तभूभृतां मूर्ध्नि विश्रान्तं मेघलीलया ॥ १८ ॥ धियेवोच्चैःपदे ज्ञानपूर्णयैकान्तशीलया । विलब्धान्यविनष्टानि राष्ट्रानीष्टार्थकारिणा ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

उनके मर जाने के उपरान्त पश्चिम दिशा के अधिनायक (आपके सामन्त) ज्यों ही सेना बटोर कर आपकी पूर्व ओर दक्षिण दिशाओं को शत्रु से मुक्त करने की इच्छा से जा रहे थ त्यों ही रास्ते में शत्रुओं ने पूर्व देश ओर दक्षिण देश के राजाओं के साथ संग्राम में उन्हें मार दिया