Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
मया पूर्वं पुरोडाश इव देवेश दीयते ।
यदि तुष्टोऽसि भगवंस्तदनेन कृतेन मे ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : भय-चकित राजा त्वरापूर्वक यह सव कह
ही रहा था कि द्वारपाल ने घबराहट के साथ प्रवेश कर प्रणामपूर्वक राजा से यह कहा