Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
चत्वारो भवतः कुण्डात्स्वदेहाः प्रोद्भवन्तु मे ।
बलवन्तः श्रिया दीप्ता नारायणभुजा इव ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
द्वारपाल बोला : महाराज, उत्तर दिशा का सेनाधिपति ड्योढ़ीपर खड़ा है जैसे कमल सूर्य के दर्शन
की आकांक्षा करता है वैसे ही महाराजधिराज के (आपके) दर्शन चाहता है