Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
तैश्चतुर्दिक्कमेवारीन्वध्यामहमविघ्नतः ।
त्वया च दर्शनं देयं मह्यं मतिमते विभो ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा ने कहा :
जाओ, बहुत जल्द ही उसे प्रवेश कराओ, उसके मुँह से वृत्तान्त के भली-भाँति श्रवण से दिगन्तों
में क्या घटना घटी यह जानेंगे