Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
पापा म्लेच्छा धनाढ्याश्च नानादेश्याः सुसंहताः ।
बहवो लब्धरन्ध्राश्च सामादेर्नास्पदं द्विषः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
लोकालोक पर्वत की सुवर्णशिला से स्वच्छ किसी वस्तु में
स्थित चिदाकाश के कोने में, उस कोने के भी किसी एक भाग में, इस त्रैलोक्य के तुल्य कोई जगत्
इसी जगत्प्रसिद्ध भुवन, द्वीप, देश, काल आदि की व्यवस्था से युक्त है