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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

तत्सुसाहसमेवेदं वर्जयित्वा प्रतिक्रिया । नान्यास्ति शीघ्रमेवातो रणोद्योगो विधीयताम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

उसमें जम्बूदीप नामक भूमि का भूषणभूत कोई एक भूमिभाग है । उसमें भी पर्वत, चहारदिवारी, बालू आदि से होने वाली विषमता न होने में (समतल भूमि होने से) मनुष्य, हाथी, घोड़े, रथ आदि के गमनागमन आदि व्यवहार से युक्त भूमि में (समभूमि में) ततमिति नाम से विख्यात एक नगरी थी