Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verses 6–7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verses 6–7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 6,7
संस्कृत श्लोक
वीराणां दीयतामाज्ञा पूज्यन्तामिष्टदेवताः ।
आहूयन्तां च सामन्ता हन्यतां रणदुण्दुभिः ॥ ६ ॥
सन्नह्यन्तामशेषेण निर्गच्छन्तु रणे भटाः ।
क्रियन्तां कालकम्पाभ्रमेदुरा राजिता दिशः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
में सुमेरु शोभा पाता है, वैसे ही वह अपनी सभा में शोभा पाता था