Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 45
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हिन्दी अर्थ
उस मण्डल की सीमा में
स्थित छावनी से युद्ध के लिए जाते हुए स्वामी ने यह निवेदन करने के लिए श्रीमान् के समीप मुझे
भेजा है