Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 44
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हिन्दी अर्थ
भाले आदि हथियारों की श्रेणियाँ परस्पर टकराने के कारण मानों
क्रोधवश भीषण हुंकारों से जलती हैं और कठोर शब्द करती हैं