Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 43
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हिन्दी अर्थ
जैसे मछली ओर मगरो के समूह से युक्त चक्राकार जल भ्रमिवाले कल्लोल सागर से आविर्भूत होते
हैं वैसे ही मत्स्य, मकर की-सी आकृति व्यूहो से युक्त, तलवारों के आवर्त से युक्त सेनासंघात
आविर्भूत हो रहा है