Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 109, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 47
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हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामचन्द्रजी, गुड़ गुड़ शब्द करके विलीन हुई समुद्र की लहर
के समान वह पुरुष राजा से यह निवेदन कर प्रणामपूर्वक शीघ्रता से चला गया