Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 11, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 11, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
जगत्पदार्थसत्तान्तः सामान्येनाशु भाविते ।
मनोहंकारबुद्ध्यादि कः कलङ्कोऽमलात्मनि ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकार, बुद्धिआदिरूप भला कौन-सा कलंक रह सकता है ?