Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 11, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 11, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
यथा घटपटाद्यर्थान्पश्यस्येवं शरीरकम् ।
तथाहन्त्वमनोबुद्धिवेदनाद्यपि पश्य हे ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे घट, पट आदि पदार्थों
को तुम तटस्थरूप से देख रहे हो, वैसे ही हे विद्याधर, अहन्ता आदि का अभिमान छोड़ करके
शरीर को पहले तटस्थरूप से देख लेने के बाद तुम अहन्ता, मन, बुद्धि और ज्ञान आदि को भी
तटस्थरूप से ही देखते रहो