Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 110, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
जितसागरकल्लोलं तुरङ्गमतरङ्गकैः ।
दन्तिदन्तविनिष्पेषतारक्रेंकारकर्कशम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
राजा ने कहा : संग्राम के लिए
शीघ्र प्रस्थान कीजिये । नगर रक्षा, व्यूहरचना आदि की व्यवस्था कीजिये । मैं भी स्नान के
उपरान्त अग्निदेव की पूजा कर संग्राम-भूमि में आता हूँ